सरहद

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सरहद पर वो खड़े रहे 

स्वाभिमान पर अड़े रहे 

 वक़्त आया तो भिड़ गए वो मौत से

माँ की तस्वीर, बच्चों के ख़त

उनके बटुओं में पड़े रहे ।

वजह

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वजह ये नहीं है , या थी , या रहेगी, 

कि तुम कितने बुद्धिमान हो 

वजह हमेशा से यही है , यही थी और रहेगी, 

कि  तुम कहाँ  पे जन्मे , तुम किसकी संतान हो

नेताजी का भाषण

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बंद हो गया दाना पानी,
नहीं मिला जब राशन
कस के बांधो पेट पे गमछा,
और सुनो सब नेताजी का भाषण।

रंग

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रंगों  का बड़ा शौक है उसे ,

जिस दिन से आयी वो घर में,

परदे गुलाबी हो गए और जिंदगी सुनहरी ।

आइना

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आइना शक्लें  जुदा कर  गया

मेरी नस्लें  पता कर गया

निगाहें  ढूढती  रहीं  सरहदों  के निशाँ

बस यहीं  वो दगा कर गया  ।

दुनिया

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सब कुछ बिल्कुल बना मिले,
ये दुनिया ऐसी कहाँ मिले |

जो तू माँगे तो खाक मिले,
जो ना माँगे तो जहाँ मिले |