बाजार

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बाजार में खड़ा हूँ

दामन बिछाये  अपना,

बोली लगाइये साहिबान

बहुत जरूरी है मेरा बिकना

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रंग

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रंगों  का बड़ा शौक है उसे ,

जिस दिन से आयी वो घर में,

परदे गुलाबी हो गए और जिंदगी सुनहरी ।

आइना

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आइना शक्लें  जुदा कर  गया

मेरी नस्लें  पता कर गया

निगाहें  ढूढती  रहीं  सरहदों  के निशाँ

बस यहीं  वो दगा कर गया  ।

दुनिया

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सब कुछ बिल्कुल बना मिले,
ये दुनिया ऐसी कहाँ मिले |

जो तू माँगे तो खाक मिले,
जो ना माँगे तो जहाँ मिले |

सवाल

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उसे ठोकर ना लगाओ अभी वो ज़िंदा है
रुकी साँसो पे ना जाओ अभी वो जिंदा है
माना कि रुक गया है धड़कनो का सिलसिला
माना कि थम गयी है जिस्म की हलचल
पर आँखों मे उठते ख्याल तो देखो
जुबाँ पे जमे हुए सवाल तो देखो
मुझे यकीन है की वो ज़िंदा है
बस शायद खुद पे या खुदा पे शर्मिंदा है

शहरी

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खबर आयी है कि सूखा पड़ा है गांवों में
लोग पानी को तरसते हैं,
सुनकर जी भर आया, बेचारे पढ़ लिख गये होते तो ऐसा ना होता
बिसलेरी बीस की ही तो आती है |

रहगुजर

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ये रास्ता कहीं तक तो जाता है,

वैसे मुझे फ़िक्र नही कि कहाँ जाता है,

बस चलने का शौक है, कफिलों की तलब है