कश्मकश

Long poems

मंजिलों की कश्मकश 

उलझा गयी कुछ यूँ हमें 

सर खपाना याद रखा 

पर मुस्कुराना भूल आये 

आकड़ों की गश्त से 

सहमे हुए हैं ख्वाब सारे 

हमने हर पैमाना याद रखा 

पर गुनगुनाना भूल आये