शुरू करते हैं

Long poems

छोड़ दे बेचैन रहना

चलो जो बन पाए वो करते हैं

लड़ते जाना  भिड़ते जाना

तो हिम्मत है ही

कभी-कभी हिम्मत है ये भी कहना,

कि  डरते हैं

मंजिल दौड़कर पा जाओगे

तो फिर क्या दौड़ने का मजा

आइये हुजूर जरा

मुंह के बल भी गिरते हैं

कभी जो हो जाए,

इज़्ज़त का फालूदा

फ्रिज में रखना और कहना,

चलो अब इसको ठंडा करते हैं

हारने के डर  से बैठे हो,

अखाड़ा  छोड़कर

आओ दो दो हाथ करें

कीचड़  में कुश्ती  लड़ते  हैं

तमाशा देखने बैठी है दुनिया

और हम तुम बन्दर बन बीच खड़े

बाँध  घुँघरू ,नाच मेरे संग

भले ही दुनिया लाख कहे ,

देखो दो मूरख बन्दर क्या करते हैं  ।

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